भ्रष्‍टाचार पर वार

राघवेन्द्र प्रताप सिंह: उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अभिषेक प्रकाश का निलंबन राज्य में प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उन पर डिफेंस कॉरिडोर भूमि अधिग्रहण में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसके परिणामस्वरूप मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके खिलाफ यह कड़ा कदम उठाया है। लखनऊ के सरोजनीनगर क्षेत्र के भटगांव में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं। आरोप है कि इस प्रक्रिया में लगभग 90 फर्जी पट्टे बनाए गए और उन्हें संक्रमणीय भूमिधर भूमि घोषित कर मुआवजा प्राप्त किया गया। इन फर्जीवाड़ों के माध्यम से करोड़ों रुपये का मुआवजा निकाला गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ। राजस्व परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. रजनीश दुबे द्वारा की गई जांच में तत्कालीन जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश सहित एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल जैसे 18 अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई।

जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों की भूमि सस्ते में खरीदकर महंगे दामों पर बेची गई, जिससे सरकारी धन की हानि हुई। इन गंभीर आरोपों के मद्देनजर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 20 मार्च 2025 को अभिषेक प्रकाश को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उन्हें राजस्व परिषद से संबद्ध किया गया है और उनके खिलाफ विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं। इसके अलावा, इस मामले में शामिल अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना है। अभिषेक प्रकाश 2006 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और बिहार के निवासी हैं। उन्होंने आईआईटी रुड़की से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन तथा पब्लिक पॉलिसी में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर के दौरान, उन्होंने लखनऊ, लखीमपुर खीरी, अलीगढ़ और हमीरपुर के जिलाधिकारी के रूप में सेवाएं दी हैं। इसके अलावा, वे लखनऊ विकास प्राधिकरण के वाइस चेयरमैन और औद्योगिक विकास विभाग के सचिव एवं इन्वेस्ट यूपी के सीईओ के पदों पर भी कार्यरत रहे हैं। अभिषेक प्रकाश का निलंबन उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति “जीरो टॉलरेंस” नीति का एक और उदाहरण है। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार में लिप्त किसी भी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह कितना भी उच्च पद पर क्यों न हो। यह कदम प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अभिषेक प्रकाश के निलंबन से यह स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त रुख अपनाए हुए है। डिफेंस कॉरिडोर भूमि अधिग्रहण घोटाले में उनकी संलिप्तता के आरोपों की गहन जांच जारी है, और यदि वे दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ और भी कठोर कार्रवाई हो सकती है। यह मामला प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक चेतावनी है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

क्या है कमीशन का पूरा मामला, जिसमें फंस गए अभिषेक प्रकाश

शिकायतकर्ता विश्वजीत दत्त ने उनके खिलाफ शिकायत की थी, जिसमें कहा था कि हमारा ग्रुप उत्तर प्रदेश में सोलर सेल और सोलर ऊर्जा से संबंधित कल पुर्जे बनाने का संयंत्र की इकाई की स्थापना करना चाहता है. इसके लिए हमने इन्वेस्ट यूपी के ऑफिस और ऑनलाइन प्रार्थना पत्र भेजा था। इसके संबंध में मूल्यांकन समिति की बैठक हुई थी। इसमें हमारे प्रकरण के विचार से पूर्व मुझे इन्वेस्ट यूपी के वरिष्ट अधिकारी ने एक प्राइवेट व्यक्ति निकांत जैन का नंबर दिया और कहा कि उससे बात कर लीजिए. यदि वह कहेगा तो आपका मामला एम्पावर्ड कमेटी और कैबिनेट से तुरंत अनुमोदित हो जाएगा।

शिकायत कर्ता ने बताया कि अधिकारी के कहने पर हमने निकांत जैन से बात की. निकांत ने मुझे हिसाब करने को बोला. पूरे मामले के लिए पांच फीसदी की मांग की। अग्रिम के रूप में धन मांगा। चूंकि, मेरे मालिक उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री से इस प्रोजेक्ट के लिए मिले थे, इसलिए हमने निकांत को मना कर दिया. बाद में मुझे पता चला कि मेरे मामले में संस्तुति होने के बाद पत्रावली में प्रकरण को टाल दिया गया है। निकांत ने मुझसे कहा कि आप और आपके मालिक जितना भी प्रयास कर लें, उन्हें आना तो जैन साहब के पास ही होगा। तभी काम हो पाएगा नहीं तो काम नहीं हो पाएगा। हमारे मालिक इस प्रोजेक्ट को किसी दूसरे स्टेट में भी ले जा सकते हैं, ऐसे में मेरा अनुरोध है कि इन लोगों पर कार्रवाई कर हमारे प्रोजेक्ट को स्वीकृत करने की कृपा करें। इस शिकायत का संज्ञान लेकर सीएम योगी ने कार्रवाई की। इस समय यूपी के कई अधिकारियों पर कार्रवाई चल रही है। कुछ दिन पहले सस्पेंड चल रहे सात आईएएस और पीसीएस अधिकारियों को नई तैनाती दी गई थी। इनमें प्रतीक्षारत चल रहे आइएएस घनश्याम सिंह को विशेष सचिव वन बनाया गया था। वहीं चार पीसीएस अधिकारियों को भी नई तैनाती दी गई थी।

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