उन्होंने पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उदाहरण देते हुए कहा कि जब सीएए लाया गया था, तब विपक्षी दलों द्वारा कहा गया कि इससे मुसलमानों की नागरिकता छिन ली जाएगी। लेकिन अब स्थिति सबके सामने है। इसे लेकर लंबे समय तक भ्रम फैलाकर लोगों को डराया गया। धारा 370 हटाने के समय, राम मंदिर निर्माण को लेकर भी भ्रम फैलाने की कोशिश की गई। लोकसभा चुनाव के दौरान भी संविधान बदलने को लेकर अफवाह फैलाई गई। आज एक बार फिर वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर झूठ फैलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज विपक्ष जो भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है, दो-चार महीनों में मुसलमान भाइयों को भी हकीकत का पता चल जाएगा। पिछले 11 सालों से केंद्र में एनडीए की सरकार है, विपक्ष विभिन्न मुद्दों को लेकर डराने का काम करता रहा, लेकिन इन 11 सालों में मुसलमानों के साथ कोई अन्याय नहीं हुआ, बल्कि गरीब मुस्लिमों के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं बनाई गईं। उनको ईमानदारी से लाभ दिया गया।
उन्होंने आगे कहा, इस बिल को लेकर हमारी पार्टी लोक जनशक्ति (रामविलास) से जो लोग नाराजगी जता रहे हैं, उनसे हमें कोई दिक्कत नहीं है। उनकी नाराजगी मेरे पिता से भी रही, जब 2014 में उन्होंने यूपीए का साथ छोड़कर एनडीए का साथ दिया था।
उन्होंने यह भी कहा, मेरे पिता रामविलास पासवान ने मुस्लिम समुदाय के नेता को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने की 2005 में मांग की थी। उस वक्त पूरी पार्टी हाशिए पर चली गई, लेकिन वे उनके साथ खड़े रहे। मेरे अंदर भी उन्हीं का खून है। उन्हीं की सोच लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं। वक्त बताएगा कि चिराग पासवान सही था या नहीं? कोई अगर नाराज है तो उसकी नाराजगी को दूर करने की कोशिश करेंगे। मेरा समर्पण रामविलास पासवान के सामाजिक न्याय की सोच के प्रति है।