व्हाइट हाउस ने जब से टैरिफ लिस्ट जारी की तभी से इसमें बेहद अहम देश रूस की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी हुई है। इसे लेकर व्हाइट हाउस की तरफ से सफाई भी जारी की गई।
हालांकि रूस का टैरिफ लिस्ट से बाहर होना बहुत हैरानी की बात नहीं है। व्हाइट हाउस में दूसरी बार एंट्री के बाद से ट्रंप, रूस को लेकर बेहद नरम रुख अपना रहे हैं। यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर भी उन्होंने कीव को लगातार निशाने पर लिया जबकि मॉस्को का बयाव किया।
अमेरिकी आउटलेट एक्सियोस के मुताबिक व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि रूस को इसलिए (टैरिफ लिस्ट से) बाहर रखा गया क्योंकि वह पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों के अधीन है, जो क्रेमलिन और वाशिंगटन डीसी के बीच किसी भी सार्थक व्यापार को रोकते हैं।
रूस ने ट्रंप से अमेरिका की मध्यस्थता वाली यूक्रेन युद्ध विराम वार्ता के तहत कुछ प्रतिबंधों को हटाने के लिए कहा है।
हालांकि लेविट का कहना है कि कि रूस को अभी भी अतिरिक्त कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। बता दें ट्रंप ने हाल ही में रूस को तेल पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। यूएस प्रेसिडेंट के मुताबिक वह यूक्रेन के बारे में की गई रूसी राषट्रपति व्लादिमीर पुतिन की टिप्पणियों से नाराज हैं।
यूक्रेन पर रूस के हमले के कारण लगाए गए प्रतिबंधों के कारण अमेरिका-रूस व्यापार का मूल्य 2021 में लगभग 35 बिलियन डॉलर से घटकर पिछले वर्ष 3.5 बिलियन डॉलर रह गया। अमेरिका अभी भी मॉरीशस या ब्रुनेई जैसे देशों की तुलना में रूस के साथ अधिक व्यापार करता है, जो ट्रंप की टैरिफ सूची में शामिल है।
रूस के अलावा क्यूबा, बेलारूस और उत्तर कोरिया को भी टैरिफ लिस्ट से बाहर रखा गया है। लेविट का कहना है कि इन देशों पर मौजूदा शुल्क और प्रतिबंध पहले से ही बहुत अधिक हैं।
कनाडा और मैक्सिको को भी इस टैरिफ लिस्ट में शामिल नहीं किया गया। लेविट ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि ट्रंप ने पहले ही दोनों पर 25 टैरिफ लगा दिया था।