ईश्वर ने इन चारों मूर्तियों को एक हस्तनिर्मित मंडप (मंदिर जैसी संरचना) में सजाया है। यह मंडप भी बेहद छोटा है, जिसकी ऊंचाई सिर्फ 3 इंच और चौड़ाई 4 इंच है। इस नाजुक और खूबसूरत कलाकृति को तैयार करने में उन्हें सात दिन का समय लगा। ईश्वर ने बताया कि उन्होंने बहुत सावधानी और मेहनत से इन मूर्तियों को उकेरा, ताकि हर बारीकी साफ नजर आए।
राम नवमी से पहले खास अंदाज में ईश्वर ने अपनी कला के जरिए लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, मैं इस कलाकृति के माध्यम से सभी को राम नवमी की अग्रिम बधाई देता हूं। मेरी प्रार्थना है कि भगवान राम का आशीर्वाद हम सब पर बना रहे। उनकी यह रचना न सिर्फ उनकी प्रतिभा को दिखाती है, बल्कि उनकी भक्ति और समर्पण को भी सामने लाती है।
ईश्वर पहले भी अपनी लघु कला के लिए चर्चा में रह चुके हैं। वे हमेशा कुछ नया करने की कोशिश करते हैं और साधारण चीजों से असाधारण कला बनाते हैं। इस बार चाक जैसी आम सामग्री से बनाई गई यह छोटी मूर्तियां लोगों के बीच कौतूहल और प्रशंसा का विषय बनी हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ईश्वर की कला जितनी के लिए गर्व की बात है। उनकी यह रचना राम नवमी के उत्सव को और खास बना रही है।
रामनवमी हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। यह चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पड़ता है। मान्यता है कि इस दिन त्रेतायुग में अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर भगवान विष्णु के सातवें अवतार के रूप में श्रीराम का जन्म हुआ था।
रामनवमी के दिन भक्त मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं, रामायण का पाठ करते हैं और भजन-कीर्तन में हिस्सा लेते हैं। अयोध्या सहित देशभर में शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। भगवान राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान की झांकियां सजाई जाती हैं। लोग व्रत रखते हैं और प्रसाद बांटते हैं। यह पर्व मर्यादा, धर्म और सत्य के प्रतीक श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर देता है।