संजय जायसवाल ने कहा कि सोनिया गांधी को वक्फ विधेयक को असंवैधानिक कहने से पहले अपने परिवार से सवाल पूछने चाहिए थे। देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने 1954 में यह कानून क्यों बनाया, राजीव गांधी ने इसमें संशोधन क्यों किया, और नरसिम्हा राव तथा मनमोहन सिंह जैसे नेताओं ने इसे क्यों बदला?
जायसवाल ने कहा कि कांग्रेस पांच बार इस कानून में बदलाव कर चुकी है, लेकिन बीजेपी एक बार भी ऐसा नहीं कर सकती? उन्होंने वक्फ संपत्ति में बढ़ोतरी पर भी सवाल उठाए।
उनके मुताबिक, 1913 से 2013 तक 100 साल में वक्फ की जमीन 17 लाख एकड़ थी, लेकिन 2013 से 2024 के 11 साल में यह बढ़कर 37.5 लाख एकड़ हो गई। उन्होंने पूछा कि यह जमीन कहां से आई, क्योंकि बड़े मुस्लिम धनाढ्यों जैसे अजीम प्रेमजी, शाहरुख खान या सलमान खान ने अपनी जमीन वक्फ को नहीं दी।
जायसवाल ने कहा कि सरकार ने धैर्य से काम लिया और भविष्य को ध्यान में रखकर यह विधेयक लाई, वरना कोई यह भी कह सकता है कि पूरा देश वक्फ की संपत्ति है।
रवि किशन ने इसे गरीब मुस्लिमों के लिए बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष भी चाहता था कि यह विधेयक पास हो, लेकिन अपनी भूमिका निभाने के लिए विरोध कर रहा था।
उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड की वजह से बहुत गलतियां हुईं, लेकिन अब इस विधेयक से गरीब मुसलमानों, पसमांदा और बोहरा समुदाय का भला होगा। उन्होंने इसे मोदी सरकार की दूरदर्शी सोच का नतीजा बताया और कहा कि यह देश के हर वर्ग के लिए एक बड़ा संदेश है।
भाजपा सांसद ने कहा कि पहले देश को समझाया और पढ़ाया गया, अब कमियों को दूर किया जा रहा है। युवाओं को भविष्य चुनने के लिए मोदी सरकार एक बेहतर भारत दे रही है।
प्रताप राव जाधव ने इसे ऐतिहासिक दिन करार दिया और कहा कि यह विधेयक बाला साहेब ठाकरे के सपने को पूरा करता है। उन्होंने कहा कि एनडीए सांसदों ने इसे पास करवाकर हिंदुत्व के लिए बड़ा काम किया, लेकिन कुछ लोग जो हिंदुत्व की बात करते हैं, उन्होंने इसका विरोध किया।
जाधव ने कांग्रेस पर अल्पसंख्यकों को डराने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने बाबरी मस्जिद, धारा 370, तीन तलाक और अब वक्फ विधेयक को लेकर डर फैलाने की कोशिश की, लेकिन हर बार देश में शांति रही। जाधव ने कहा कि नरेंद्र मोदी, किरेन रिजिजू और अमित शाह के नेतृत्व में यह विधेयक पास हुआ, जो देश के लिए गर्व की बात है।