फाउंडिट की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत में 68 लाख से अधिक पेशेवर व्हाइट-कॉलर गिग वर्कफोर्स का हिस्सा हैं, जिनमें से अधिकांश (66 प्रतिशत) कॉर्पोरेट, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और स्टार्टअप कंपनियों के माध्यम से काम करते हैं।
बाकी के 34 प्रतिशत कंसल्टेंट, स्टाफिंग फर्म्स और फ्रीलांस प्लेटफॉर्म में काम कर रहे हैं।
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि गिग अर्थव्यवस्था का विस्तार कई उद्योगों में हो गया है, जिसमें आईटी सॉफ्टवेयर और सेवाएं प्रमुख क्षेत्र बने हुए हैं और मार्च में गिग नियुक्तियों में इनका योगदान 32 प्रतिशत रहा।
हालांकि, पिछले वर्ष की 46 प्रतिशत की तुलना में इसकी हिस्सेदारी में गिरावट आई है, जो उद्योग की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षा/एड-टेक क्षेत्र में गिग वर्कर्स की की हिस्सेदारी एक वर्ष पहले के 8 प्रतिशत से बढ़कर 14 प्रतिशत हो गई है।
स्टाफिंग में भी गिग जॉब्स की संख्या में वृद्धि देखी गई है और जो कि बढ़कर 12 प्रतिशत हो गई है।
गिग हायरिंग में प्रमुख शहर अग्रणी बने हुए हैं, दिल्ली-एनसीआर की कुल गिग नौकरियों में 26 प्रतिशत की हिस्सेदारी है, इसके बाद 18 प्रतिशत के साथ मुंबई और 12 प्रतिशत के साथ बेंगलुरु का स्थान है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि छोटे शहर जैसे कोयम्बटूर 44 प्रतिशत, पुणे 38 प्रतिशत और बड़ौदा 37 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मजबूत नौकरी बाजार के रूप में उभर रहे हैं।
फाउंडिट के सीईओ वी सुरेश ने कहा कि गिग इकॉनमी भारत के कार्यबल विकास के प्रमुख चालक के रूप में उभर रही है।
उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे संस्थाएं अपनी कार्यबल रणनीतियों में गिग प्रतिभा को एकीकृत कर रहे हैं, सफलता विशेषज्ञता और गतिशील बाजार बदलावों को नेविगेट करने की क्षमता पर निर्भर करेगी।