‘बहुध्रुवीय व्यवस्था के युग’ में भारत-रूस के बीच अधिक सहयोग की जरूरत

शाश्वत तिवारी। आज के तेजी से बदलते दौर में भारत और रूस एक ‘जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य’ से गुजर रहे हैं और ‘बहुध्रुवीय व्यवस्था के युग’ में दोनों देशों के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने गुरुवार को कहा कि भारत, रूस के साथ अपने संबंधों को बेहद महत्व देता है और दोनों देश इस गहरी मित्रता को प्रगाढ़ करने और सहयोग के नए आयाम तलाशने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
‘रूस और भारत: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर’ सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत और रूस के बीच खास और विशेष रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ बनाना विदेश नीति की एक साझा प्राथमिकता बनी हुई है।
सम्मेलन का आयोजन रूसी अंतरराष्ट्रीय मामलों की परिषद (आरआईएसी) और मॉस्को में स्थित भारतीय दूतावास ने किया। इस दौरान विदेश मंत्री ने कहा ऐतिहासिक जुड़ाव और विश्वास व पारस्परिक सम्मान की दीर्घकालिक परंपरा पर आधारित इस संबंध का गतिशील विश्व व्यवस्था की पृष्ठभूमि में निरंतर विस्तार हो रहा है। ऊर्जा, रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग जैसे क्षेत्र पारंपरिक रूप से हमारे संबंधों में प्रमुख रहे हैं। वहीं व्यापार, प्रौद्योगिकी, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, कनेक्टिविटी और डिजिटल अर्थव्यवस्था सहयोग के नए क्षेत्र के रूप में उभर रहे हैं। भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
सम्मेलन में शामिल रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापार बढ़ रहा है और दोनों देश तकनीक के क्षेत्र में भी सहयोग कर रहे हैं। दोनों देश मिलकर नई-नई तकनीक विकसित कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों को फायदा हो रहा है। उन्होंने बताया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर जल्द ही भारत आएंगे।

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