राजधानी स्थित यूनियन कार्बाइड संयंत्र में दो-तीन दिसंबर 1984 की दरम्यानी रात को जहरीली गैस का रिसाव हुआ था। इसके चलते हजारों लोगों की मौत हुई थी। लाखों लोग इसके दुष्प्रभाव का शिकार हुए थे। संयंत्र में बीते चार दशक से जहरीला कचरा जमा था, जिसे उच्च न्यायालय के निर्देश पर पीथमपुर स्थित संयंत्र में नष्ट किया जाना है।
पीथमपुर पहुंचे जहरीले कचरे को नष्ट करने की प्रक्रिया जारी है। इस मामले पर गुरुवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई और न्यायालय ने राज्य सरकार को कचरा नष्ट करने के लिए 72 दिन का समय दिया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने बताया है कि पिछली सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने सरकार को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। इस पर राज्य सरकार की ओर से दिए गए हलफनामे में कहा गया है कि कचरे को जलाने में 72 दिन का समय लगेगा। साथ ही यह भी कहा गया कि संयंत्र की क्षमता एक घंटे में 270 किलो अवशिष्ट को नष्ट करने की है। इस पर न्यायालय ने सरकार को 72 दिन का समय दिया है और अगली तारीख 30 जून लगाई है।
अधिवक्ता नागरथ ने आगे बताया कि कुछ लोगों ने कचरा जलाए जाने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में आवेदन दिया था, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने किसी भी तरह का दखल देने से मना कर दिया। संबंधित जन अपने सुझाव सरकार को दे सकते हैं।
ज्ञात हो कि जहरीले कचरे को उच्च न्यायालय के निर्देश पर बंद कंटेनरों में भोपाल से पीथमपुर तक ले जाया गया था। उसके बाद स्थानीय लोगों ने विरोध किया, मगर कचरे को जलाने की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रारंभिक तौर पर प्रयोग सफल रहा है।