एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने दूसरा मून मिशन लॉन्च कर दिया है. लॉन्चिंग अमेरिका से हुई है. मून मिशन चांद के सबसे बड़े पहाड़ पर लैंड करेगा. इसके बाद ये मिशन चांद के सतह की जानकारी इकट्ठा करेगा.
स्पेसएक्स के इस मून मिशन के बारे में जानें सबकुछ
मून लैंडर धरती से चांद की दूरी को आठ दिन में पूरा करेगा. छह मार्च को लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग करवाई जाएगी. इंट्यूशिव मशींस नाम की कंपनी ने इसे बनाया है. इसी वजह से मून लैंड का नाम भी इस पर रखा गया है. एथेना मून लैंडर चांद के साउथ पोल के करीब मोन्स माउटन पर लैंड करेगा. ये चांद का सबसे बड़ा पहाड़ है. ये पहाड़ 100 किलोमीटर तक फैला हुआ है. ये सतह से 20 हजार फीट ऊंचा है. लैंडिंग के बाद ये लैंडर चांद पर लगभग 10 दिनों तक काम कर सकता है.
मून लैंडर में क्या-क्या है?
स्पेसएक्स के मून लैंडर पर एक छोटा रोबोट माइक्रो नोवा हॉपर है. इसे ग्रेस नाम दिया गया है. इसके अलावा, इसमें चार पहियो वाला माइक्रोवेव के आकार का एक रोवर भी है. चांद पर ये भी जानकारी जुटाने का काम करेगा.
मून मिशन का क्या है उद्देश्य
स्पेसएक्स के इस मून मिशन का मकसद चांद की सतह से जुड़ी जानकारियों को इकट्ठा करना है. लैंडर पर मौजूद रोवर में एक ड्रिल मशीन लगाई गई है. ये 10 दिनों तक ड्रिल करेगी. एक बार की ड्रिलिंग पर लगभग 10 सेंटीमीटर की खुदाई हो जाएगी. यानी कुल एक मीटर अंदर तक मशीन जाएगी. इसके बाद अंदर से ये सैंपल इकट्ठा करेगी.