उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लाया गया वक्फ संशोधन विधेयक मुसलमानों के लिए लाभकारी है, खासकर गरीबों, पसमांदा, महिलाओं, विधवाओं और बच्चे इसके फायदे को प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड यह आरोप लगाते हुए कि इस कानून के लागू होने से मस्जिदें, कब्रिस्तान और उनके आसपास की संपत्तियां समाप्त हो जाएंगी, इस कानून को लेकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।
पार्लियामेंट कमेटी के चेयरमैन ने यह भी कहा कि यह सब अराजकता फैलाने की कोशिश है, जो कि सफल नहीं होगी। विपक्ष पर भी तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया गया है, विशेष रूप से असदुद्दीन ओवैसी पर, जिन्हें यह अच्छी तरह से पता है कि इस संशोधन में कोई धार्मिक स्थल या संपत्ति को हस्तगत करने का कोई प्रावधान नहीं है। जगदंबिका पाल ने कहा कि यह विधेयक पारदर्शी और मुसलमानों के लिए लाभकारी है, फिर भी गुमराह किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि जंतर-मंतर और पटना में हुए प्रदर्शनों से कानून की प्रक्रिया में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यदि विधेयक में किसी भी प्रकार की असंवैधानिकता पाई जाती है, तो लोग कोर्ट जा सकते हैं। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि ज्वाइंट पार्लियामेंट कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, जो अब कैबिनेट में मंजूरी के लिए है। इसके बाद, कानून मंत्रालय में संशोधन के बाद विधेयक संसद में प्रस्तुत किया जाएगा। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री मोदी का सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का नारा इस प्रक्रिया में पूरी तरह से लागू होगा।
बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने वक्फ संशोधन विधेयक के विरोध में देशभर में आंदोलन का आह्वान किया, ऐसे में संसद में चल रहे सत्र में हंगामे की संभावना है।